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कुंडली मिलान

वर और कन्या का जन्म विवरण डालें। आपको 36 अंकों का गुण मिलान, दक्षिण भारत के 10 पोरुथम, और वे दोष जिनके बारे में परिवार पूछते हैं (नाड़ी, भकूट, रज्जु, वेध, मांगलिक), सब आसान शब्दों में मिलेगा।

वर
कन्या

नाम आपके डिवाइस पर ही रहते हैं। जन्म विवरण सिर्फ़ एक बार गणना के लिए इस्तेमाल होते हैं और सेव नहीं किए जाते।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विवाह के लिए कितने गुण मिलने चाहिए?

36 में से 18 या उससे ज़्यादा गुण पारंपरिक रूप से स्वीकार्य माने जाते हैं, 24 या ज़्यादा अच्छे, और 28 या ज़्यादा उत्तम। परिवार नाड़ी और भकूट दोष भी देखते हैं, और दक्षिण भारत में रज्जु और वेध भी, क्योंकि ऊंचे स्कोर के बावजूद इन दोषों के होने पर सावधानी ज़रूरी है।

गुण मिलान और पोरुथम में क्या अंतर है?

गुण मिलान (अष्टकूट) उत्तर भारत की पद्धति है, जिसमें 8 कूट होते हैं और कुल 36 अंक। पोरुथम दक्षिण भारत की पद्धति है, जिसमें 10 जांचें होती हैं। यह तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में प्रचलित है, जहां रज्जु और वेध को अनिवार्य माना जाता है।

क्या जन्म समय के बिना मिलान हो सकता है?

हां। गुण मिलान और पोरुथम के लिए सिर्फ़ चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र चाहिए, जो आमतौर पर जन्म तिथि से पता चल जाते हैं। मांगलिक दोष (चेव्वाई दोषम) के लिए जन्म समय और स्थान चाहिए, क्योंकि यह लग्न से गिना जाता है।

नाड़ी दोष क्या है?

जब वर और कन्या की नाड़ी एक ही हो (आदि, मध्य या अंत्य), तो नाड़ी कूट में 8 में से 0 अंक मिलते हैं। परंपरा में इसे स्वास्थ्य और संतान से जोड़ा जाता है। अगर राशि एक हो पर नक्षत्र अलग हों, या नक्षत्र एक हो पर राशि या चरण अलग हो, तो यह दोष निरस्त माना जाता है।

रज्जु पोरुथम क्या है?

27 नक्षत्र पांच रज्जु समूहों में बंटे हैं (पैर, कमर, नाभि, गला, सिर)। अगर दोनों के नक्षत्र एक ही समूह में हों, तो रज्जु नहीं मिलता। तमिल परंपरा में यह सबसे अहम जांचों में से एक है।

मिलान एक पारंपरिक मार्गदर्शन है, दो लोगों पर अंतिम फ़ैसला नहीं। निर्णय से पहले परिवार और किसी भरोसेमंद ज्योतिषी से बात करें।