Sri Sita Ramachandra Swamy Temple
Lord Rama (Vaikuntha Rama) with Sita and Lakshmana
फ़ोटो: iMahesh, CC BY-SA 4.0कथा
मान्यता है कि मेरु पर्वत के पुत्र भद्र ने गोदावरी के तट पर बरसों राम तारक मंत्र जपते हुए तप किया। विष्णु उन्हें चार भुजाओं वाले वैकुंठ राम के रूप में दिखे, गोद में सीता और पास में लक्ष्मण। तभी से इस पहाड़ी का नाम भद्र के नाम पर पड़ा। सत्रहवीं सदी में राजस्व अधिकारी कंचर्ला गोपन्ना ने कर के पैसे से मंदिर बनवाया, और सुल्तान अबुल हसन कुतुब शाह ने उन्हें 12 साल जेल में रखा। कहते हैं राम और लक्ष्मण ने सुल्तान के सपने में आकर राम माडा सोने के सिक्कों से कर्ज़ चुका दिया।
यह मंदिर क्यों खास है
भद्राचलम को दक्षिण अयोध्या कहा जाता है। भक्त रामदास के नाम से पूजे जाने वाले गोपन्ना ने सत्रहवीं सदी के उत्तरार्ध में लगभग छह लाख वराह की लागत से मंदिर पूरा किया। उनके भजन आज भी यहाँ गाए जाते हैं और उन्होंने त्यागराज को प्रेरणा दी। पूजा पांचरात्र आगम से होती है। मंदिर भद्र के शरीर की तरह बना है: सिर पर उनका मंदिर, हृदय में गर्भगृह और चरणों में राजगोपुरम।
भक्त यहाँ क्या माँगते हैं
विवाह और दांपत्य
भद्राचलम की आत्मा सीता राम कल्याणम है। यहाँ मंगलसूत्र में सोने के तीन गोल टुकड़े होते हैं: एक दशरथ के लिए, एक जनक के लिए और एक गोपन्ना के लिए, जो सीता को अपनी बेटी मानते थे। अच्छे रिश्ते और सुखी दांपत्य की कामना से परिवार कल्याणम में प्रार्थना करते हैं और तलंब्रालु चढ़ाते हैं।
शांति और पारिवारिक सुख
ब्रह्म पुराण कहता है कि यहाँ वैकुंठ राम की पूजा करने वाले को मोक्ष मिलता है और भगवान ज्ञान देते हैं। मन की शांति चाहने वाले गोदावरी में स्नान करते हैं, रामदास के कीर्तन गाते हैं और शाम की दरबार सेवा में बैठते हैं।
त्योहार
- श्रीराम नवमी ब्रह्मोत्सव (मार्च–अप्रैल): बारह दिन, सीता राम तिरुकल्याण महोत्सव और फिर महापट्टाभिषेक
- वसंतोत्सव (होली के आसपास, फरवरी–मार्च): महिलाएँ चावल, हल्दी और मोतियों से हाथ से गोटी तलंब्रालु तैयार करती हैं
- वैकुंठ एकादशी (दिसंबर–जनवरी): 21 दिन का उत्सव, गोदावरी में हंस के आकार के हंसवाहन पर तेप्पोत्सव और वैकुंठ द्वार दर्शन
- विजयदशमी (सितंबर–अक्टूबर): दस दिन रामायण पाठ, लक्ष्मी तायार के निजरूप दर्शन और रात में रामलीला
पूजा और अनुष्ठान
- सुबह 4 बजे सुप्रभात सेवा
- परिवार या दंपति के नाम से अर्चना और सहस्रनाम अर्चना
- भद्र के मंदिर में चट्टान पर बने राम के चरणों का अभिषेक
- शुक्रवार को लक्ष्मी तायार और मंगलवार को आंजनेय का अभिषेक
- शाम लगभग 7 से 8 बजे दरबार सेवा
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कैसे पहुँचें
भद्राचलम गोदावरी के किनारे, हैदराबाद से लगभग 325 किमी पूर्व में है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन भद्राचलम रोड है, जो कोत्तगुडेम शहर में, दक्षिण मध्य रेलवे के सिकंदराबाद मंडल में है। आख़िरी हिस्सा सड़क से तय होता है।
दर्शन का समय
सुबह 4 बजे सुप्रभात सेवा से दिन शुरू होता है। राजभोग के बाद दोपहर 12 से 3 बजे तक मंदिर बंद रहता है और 3 बजे फिर अर्चना शुरू होती है। रात 9 बजे के बाद पवलिंपु सेवा के साथ दिन पूरा होता है।
नियम और वेशभूषा
पोशाक, फ़ोन, कैमरा और कतार के बारे में प्रवेश द्वार पर लगी देवस्थानम की सूचनाओं का पालन करें। वैकुंठ एकादशी पर भक्त वैकुंठ द्वार से प्रवेश करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विवाह की प्रार्थना के लिए भद्राचलम कब जाना सबसे अच्छा है?
मार्च–अप्रैल में श्रीराम नवमी ब्रह्मोत्सव, जब मोतियों के तलंब्रालु के साथ सीता राम का विवाह मनाया जाता है।
क्या बिना जाए भद्राचलम में पूजा करवा सकते हैं?
हाँ। पुजारी के ज़रिए अर्चना करवाई जा सकती है, और संतोबाबा आपको वीडियो और प्रसाद भेजता है।
भद्राचलम मंदिर किसने बनवाया?
भक्त रामदास कहलाने वाले कंचर्ला गोपन्ना ने, सत्रहवीं सदी के उत्तरार्ध में, गोलकोंडा सुल्तान के तहसीलदार रहते हुए इसे बनवाया या इसका जीर्णोद्धार किया।
क्या भद्राचलम मंदिर पूरे दिन खुला रहता है?
नहीं। दोपहर 12 से 3 बजे तक बंद रहता है।
भद्राचलम की राम प्रतिमा में क्या खास है?
राम पद्मासन में बैठे हैं, चार हाथों में शंख, चक्र, धनुष और बाण, गोद में सीता और पास में लक्ष्मण खड़े हैं।
तस्वीरें






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