Sri Mallikarjuna Swamy Temple
Lord Mallikarjuna (Shiva) and Goddess Bhramaramba
फ़ोटो: Adityamadhav83, CC BY 4.0कथा
मान्यता है कि यहाँ के शिवलिंग की पूजा चमेली के फूलों से होती थी, जिसे तेलुगु में मल्लिका कहते हैं, इसीलिए भगवान का नाम मल्लिकार्जुन पड़ा। कथा है कि गणेश जी का विवाह पहले होने से नाराज़ कार्तिकेय क्रौंच पर्वत चले गए। बेटे के पास रहने के लिए शिव और पार्वती जहाँ आकर ठहरे, वही जगह श्रीशैलम बनी। दक्ष यज्ञ के बाद जब शिव सती का शरीर लेकर चले, तब सती की गर्दन यहाँ गिरी, ऐसी मान्यता है। यही माँ भ्रमरांबा का शक्तिपीठ है।
यह मंदिर क्यों खास है
श्रीशैलम बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और अठारह महाशक्तिपीठों में से भी एक। यानी एक ही पहाड़ी पर मल्लिकार्जुन स्वामी और माँ भ्रमरांबा दोनों विराजते हैं। तमिल शैव संतों ने भी इसकी स्तुति गाई है। सातवाहन काल के शिलालेख इस मंदिर का ज़िक्र करते हैं, और विजयनगर के राजा हरिहर प्रथम ने बड़े निर्माण करवाए। मंदिर की दीवारें 183 मीटर लंबी, 152 मीटर चौड़ी और 8.5 मीटर ऊँची हैं, और चार गोपुरम हैं।
भक्त यहाँ क्या माँगते हैं
दोष निवारण
ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही जगह होने से भक्त यहाँ दोष और बाधाएँ दूर होने की प्रार्थना करने आते हैं। मल्लिकार्जुन स्वामी का अभिषेक और माँ भ्रमरांबा की कुमकुम अर्चना करवाते हैं।
स्वास्थ्य और आरोग्य
भक्त अच्छी सेहत और ताक़त के लिए मल्लिकार्जुन स्वामी से प्रार्थना करते हैं। कई लोग पहले पाताल गंगा में स्नान करते हैं; इसी कृष्णा जल से शिवलिंग का अभिषेक होता है।
शांति और पारिवारिक सुख
बहुत से लोग बस मन की शांति के लिए आते हैं: कृष्णा में स्नान, शांत दर्शन, और नल्लमला के जंगल वाली पहाड़ी पर पुराने पत्थर के मंडपों में कुछ पल।
त्योहार
- महाशिवरात्रि (फ़रवरी–मार्च): मल्लिकार्जुन स्वामी की साल की सबसे बड़ी यात्रा
- उगादि (मार्च–अप्रैल): तेलुगु नववर्ष, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीशैलम पहुँचते हैं
पूजा और अनुष्ठान
- मल्लिकार्जुन स्वामी का अभिषेक, परंपरा से पाताल गंगा के कृष्णा जल से
- चमेली (मल्लिका) के फूलों से अर्चना
- स्पर्श दर्शन, जिसमें भक्त शिवलिंग को छूकर दर्शन करते हैं (देवस्थानम के तय समय में)
- माँ भ्रमरांबा की कुमकुम अर्चना
- दर्शन से पहले पाताल गंगा में पवित्र स्नान
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कैसे पहुँचें
हैदराबाद से सड़क मार्ग से लगभग 213 किमी, नल्लमला जंगल से होकर रास्ता है। कुर्नूल से लगभग 180 किमी। सबसे पास का रेलवे स्टेशन मार्कापुर रोड है, लगभग 85 किमी दूर। सबसे पास का बड़ा हवाई अड्डा हैदराबाद है।
दर्शन का समय
मंदिर सुबह लगभग 4:30 बजे खुलता है और रात करीब 10 बजे बंद होता है। स्पर्श दर्शन का समय बदलता रहता है, इसलिए जाने से पहले श्रीशैलम देवस्थानम का शेड्यूल देख लें।
नियम और वेशभूषा
दर्शन, स्पर्श दर्शन और पहनावे के नियम श्रीशैलम देवस्थानम तय करता है और ये बदल सकते हैं, इसलिए ताज़ा सूचना देख लें; पारंपरिक कपड़े सबसे अच्छे हैं। पाताल गंगा तक पहुँचने के लिए 852 सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या श्रीशैलम ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों है?
हाँ। मल्लिकार्जुन स्वामी बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और माँ भ्रमरांबा का मंदिर अठारह महाशक्तिपीठों में से एक है।
क्या बिना जाए श्रीशैलम में अभिषेक करवा सकते हैं?
हाँ। अभिषेक और अर्चना पुजारी के माध्यम से हो सकते हैं, और संतोबाबा आपको वीडियो और प्रसाद भेजता है।
हैदराबाद से श्रीशैलम कितनी दूर है?
सड़क से लगभग 213 किमी। सबसे पास का रेलवे स्टेशन मार्कापुर रोड है।
भगवान को मल्लिकार्जुन क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा मल्लिका यानी चमेली के फूलों से होती थी, इसलिए यह नाम पड़ा।
तस्वीरें






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