Englishதமிழ்हिन्दीతెలుగు
Somnath Temple, Somnath

Somnath Temple

Lord Shiva as Somnath Mahadev (Someshwara), the first Jyotirlinga

Somnath, Gujarat

फ़ोटो: Ms Sarah Welch, CC0

कथा

मान्यता है कि चंद्रदेव सोम को श्राप लगा और उनकी कांति चली गई। उन्होंने यहीं सरस्वती नदी में स्नान किया और कांति लौट आई। इसीलिए यह जगह प्रभास कहलाई, यानी तेज, और यहाँ के भगवान सोमेश्वर, चंद्रमा के स्वामी। महाभारत और भागवत पुराण प्रभास को तीर्थ बताते हैं। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने अपने अंतिम दिन यहीं बिताए।

यह मंदिर क्यों खास है

सोमनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यह प्रभास पाटण में अरब सागर के किनारे है, जहाँ पास ही कपिला, हिरण और सरस्वती का त्रिवेणी संगम है। यह मंदिर बार-बार लूटा गया और बार-बार बना। 1026 में महमूद गज़नवी ने लूटा, 1169 में कुमारपाल ने बनवाया, 1299 और 1706 में फिर तोड़ा गया, 1783 में अहिल्याबाई होलकर ने छोटा मंदिर बनवाया। आज का मारू-गुर्जर शैली का मंदिर सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रेरणा से बना और 11 मई 1951 को इसकी प्राण-प्रतिष्ठा हुई।

भक्त यहाँ क्या माँगते हैं

दोष निवारण

चूँकि स्वयं चंद्रमा यहाँ श्राप से मुक्त हुए, भक्त कुंडली के दोष, खासकर चंद्र और ग्रह संबंधी कष्ट लेकर सोमनाथ आते हैं। सोमनाथ ट्रस्ट भक्तों की ओर से कालसर्प योग निवारण विधि, नवग्रह जाप और रुद्राभिषेक करवाता है, चाहे भक्त वहाँ मौजूद हो या नहीं।

स्वास्थ्य और आरोग्य

बीमार परिजन या लंबी आयु की कामना से लोग ज्योतिर्लिंग पर महामृत्युंजय जाप और महादुग्ध अभिषेक करवाते हैं। भक्तों की आस्था है कि जिन शिव ने चंद्रमा को तेज लौटाया, वे यहाँ रक्षक और रोगहर रूप में पूजे जाते हैं।

त्योहार

  • महाशिवरात्रि (फरवरी–मार्च): मंदिर का सबसे बड़ा पर्व
  • श्रावण मास (जुलाई–अगस्त): रोज़ विशेष पूजा और बिल्व पूजा
  • कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर): दिवाली के बाद की पूर्णिमा का उत्सव
  • सोमनाथ स्थापना दिन (11 मई): 1951 की प्राण-प्रतिष्ठा की वर्षगाँठ
  • गोलोकधाम उत्सव (मार्च–अप्रैल): प्रभास से श्रीकृष्ण के प्रस्थान की स्मृति

पूजा और अनुष्ठान

  • ज्योतिर्लिंग पर रुद्राभिषेक, तीन दिन पहले बुकिंग
  • लघुरुद्र और महारुद्र पाठ, हवन सहित या बिना
  • 500 या 1000 आवृत्ति का महामृत्युंजय जाप
  • कालसर्प योग निवारण विधि और नवग्रह जाप
  • सोमेश्वर महापूजन और रेशमी ध्वजारोहण
  • श्रावण और महाशिवरात्रि में बिल्व पूजा

आपकी अपनी कुंडली का फल, पूजा बुकिंग और प्रसाद डिलीवरी — सब SantoBaba ऐप में।

कैसे पहुँचें

सोमनाथ रेलवे स्टेशन मंदिर से करीब आधा किलोमीटर और वेरावल जंक्शन लगभग 7 किमी है। नज़दीकी हवाई अड्डे दीव (लगभग 85 किमी) और केशोद (लगभग 57 किमी) हैं; राजकोट करीब 200 किमी। अहमदाबाद सड़क और रेल से लगभग 400 किमी, जूनागढ़ 82 किमी।

दर्शन का समय

दर्शन सुबह 6 से रात 10 बजे तक, दोपहर में बंद नहीं होता। आरती सुबह 7, दोपहर 12 और शाम 7 बजे। 'जय सोमनाथ' लाइट एंड साउंड शो रोज़ रात करीब 7:45–8 बजे, मानसून को छोड़कर।

नियम और वेशभूषा

मोबाइल, कैमरा, स्मार्टवॉच समेत कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान अंदर नहीं ले जा सकते; क्लोक रूम में मुफ्त लॉकर हैं। फोटोग्राफी मना है। जूते मुफ्त जूताघर में रखें। साड़ी, धोती, पैंट, टी-शर्ट ठीक हैं; मिनी स्कर्ट और अशोभनीय कपड़े नहीं। प्रवेश निःशुल्क है; ट्रस्ट के अनुसार हिंदू धर्म में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति प्रार्थना कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सोमनाथ पहला ज्योतिर्लिंग है?

हाँ। सोमनाथ को शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है।

क्या सोमनाथ मंदिर में मोबाइल ले जा सकते हैं?

नहीं। मोबाइल, कैमरा और सारे गैजेट अंदर वर्जित हैं; क्लोक रूम के मुफ्त लॉकर में रख दें।

सोमनाथ में आरती कब होती है?

सुबह 7, दोपहर 12 और शाम 7 बजे। मंदिर सुबह 6 से रात 10 बजे तक खुला रहता है।

क्या बिना गए सोमनाथ में पूजा करवा सकते हैं?

हाँ। ट्रस्ट रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप जैसी विधियाँ भक्त की अनुपस्थिति में भी करवाता है; संतोबाबा इसे व्यवस्थित कर वीडियो और प्रसाद भेजता है।

सोमनाथ जाने का सबसे अच्छा समय?

अक्टूबर से फरवरी मौसम सुहाना रहता है। महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा सबसे भव्य दिन हैं, पर भीड़ भी सबसे ज़्यादा।

तस्वीरें

इसके लिए अन्य मंदिर: दोष निवारण: Brihadeeswarar Temple · Chamundeshwari Temple · Kashi Vishwanath Temple · Kedarnath Temple · Ramanathaswamy Temple · Sri Lakshmi Narasimha Swamy Temple · Sri Mallikarjuna Swamy Temple · Sri Varaha Lakshmi Narasimha Swamy Temple

इसके लिए अन्य मंदिर: स्वास्थ्य और आरोग्य: Chamundeshwari Temple · Guruvayur Temple · Kashi Vishwanath Temple · Konark Sun Temple · Shirdi Sai Baba Temple · Sri Lakshmi Narasimha Swamy Temple · Sri Mallikarjuna Swamy Temple · Sri Varaha Lakshmi Narasimha Swamy Temple