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Sri Lakshmi Narasimha Swamy Temple, Yadagirigutta

Sri Lakshmi Narasimha Swamy Temple

Lord Lakshmi Narasimha

Yadagirigutta, Telangana

फ़ोटो: Ravindraoudeptling, CC BY 4.0

कथा

स्कंद पुराण के अनुसार, ऋष्यशृंग ऋषि के पुत्र यादऋषि ने इस पहाड़ी पर तपस्या की, और भगवान नरसिंह ने उन्हें पाँच रूपों में दर्शन दिए: ज्वाला नरसिंह, गंडभेरुंड नरसिंह, योगानंद नरसिंह, उग्र नरसिंह और लक्ष्मी नरसिंह। ऋषि के नाम पर ही इस पहाड़ी का नाम यादगिरि पड़ा, और भक्त इसे पाँचों रूपों का धाम मानते हैं।

यह मंदिर क्यों खास है

मूल गर्भगृह एक गुफा है, लगभग 12 फ़ुट ऊँची और 30 फ़ुट लंबी। इसमें ज्वाला नरसिंह सर्प जैसे रूप में और योगानंद नरसिंह ध्यान मुद्रा में दिखते हैं। मंदिर तेंकलै वैष्णव परंपरा मानता है। 2016 से 2022 के बीच लगभग ₹1,800 करोड़ की लागत से काले कृष्ण शिला पत्थर में इसे फिर से बनाया गया; परिसर 2 एकड़ से बढ़कर लगभग 16 एकड़ हुआ, सात गोपुरम और बारह आळवारों के स्तंभ बने। 28 मार्च 2022 को यह फिर खुला।

भक्त यहाँ क्या माँगते हैं

स्वास्थ्य और आरोग्य

नरसिंह भगवान को डर और बीमारी दूर करने वाले रक्षक के रूप में पूजा जाता है। भक्त अपनी सेहत के लिए और घर के बीमार सदस्यों के लिए यहाँ प्रार्थना करते हैं, और लक्ष्मी नरसिंह स्वामी की अर्चना व अभिषेक करवाते हैं।

दोष निवारण

मान्यता है कि नरसिंह भगवान दोषों और बुरी शक्तियों से होने वाले कष्ट दूर करते हैं। परिवार मंदिर के व्रत पीठ पर सत्यनारायण स्वामी व्रत करते हैं या अपने नाम से अर्चना करवाकर भगवान से रक्षा माँगते हैं।

त्योहार

  • नरसिंह जयंती (अप्रैल–मई, वैशाख शुक्ल चतुर्दशी): भगवान नरसिंह के प्रकट होने का दिन

पूजा और अनुष्ठान

  • परिवार के नाम से लक्ष्मी नरसिंह स्वामी की अर्चना
  • भगवान का अभिषेक
  • मंदिर के व्रत पीठ पर सत्यनारायण स्वामी व्रत
  • कल्याण मंडपम में लक्ष्मी नरसिंह कल्याणम
  • गुफा गर्भगृह में पाँचों नरसिंह रूपों के दर्शन

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कैसे पहुँचें

यादगिरिगुट्टा हैदराबाद के एमजीबीएस से सड़क मार्ग से लगभग 65 किमी और उप्पल से लगभग 55 किमी है। सबसे पास का रेलवे स्टेशन रायगिर है, जिसका नाम अब यादाद्रि है, लगभग 5 किमी दूर; भुवनगिरि स्टेशन लगभग 13 किमी। सबसे पास का हवाई अड्डा हैदराबाद है।

दर्शन का समय

मंदिर सुबह लगभग 4 बजे खुलता है और रात करीब 9:45 बजे बंद होता है; दोपहर में नैवेद्य के लिए थोड़ी देर दर्शन रुकते हैं। जाने से पहले ताज़ा समय देख लें।

नियम और वेशभूषा

दर्शन और पहनावे के नियम मंदिर प्रशासन तय करता है और ये बदल सकते हैं, इसलिए ताज़ा सूचना देख लें; पारंपरिक कपड़े सबसे अच्छे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यादगिरिगुट्टा को यादाद्रि क्यों कहते हैं?

ऋष्यशृंग ऋषि के पुत्र यादऋषि ने यहाँ तपस्या की थी। यादगिरि और यादाद्रि दोनों का अर्थ है याद की पहाड़ी।

क्या बिना जाए यादाद्रि में अर्चना करवा सकते हैं?

हाँ। अर्चना और अभिषेक पुजारी के माध्यम से हो सकते हैं, और संतोबाबा आपको वीडियो और प्रसाद भेजता है।

नया यादाद्रि मंदिर कब खुला?

काले कृष्ण शिला पत्थर से दोबारा बना मंदिर 28 मार्च 2022 को खुला।

हैदराबाद से यादगिरिगुट्टा कितनी दूर है?

एमजीबीएस से लगभग 65 किमी और उप्पल से 55 किमी। सबसे पास का स्टेशन यादाद्रि (पहले रायगिर) लगभग 5 किमी दूर है।

तस्वीरें

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